हम क्यूँ बदल जातें हैं


हम क्यूँ बदल जातें हैं

बुरे दिनों के बाद,
फिर अच्छे दिन आते हैं,
पतझड़ जाने पर,
पत्ते फिर लहराते हैं,
चंद ठोकरों से फिर ,
हम क्यूं बदल जाते हैं,
षाम ढ़ले देखो ,
पंक्षी आँगन आ जातें हैं,
छोटे झोंझ में देखो ,
वो खुशियाँ फिर ले आते हैं ,
कुछ पल की देरी से ,
फिर हम क्यूँ बदल जाते हैं ,
भगवान भी अधरों से अपने ,
बांस की बंसी बजातें हैं,
वीरों के वीर भी ,
करुणा के गुन गाते हैं ,
करुणा की परीक्षा में,
हम क्यूँ बदल जातें हैं ।

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