ये तुम क्या करते हो…………


किससे डरते है ये ,

किसकी निगाँहो से बचते है ये ,

तोड़ के मर्यादा क्या साबित करते है ये ,

गलत की परिभाषा को क्यों परिभाषित करते हैं ये ,

माँ -बाप भी देख इन्हें अपने कर्मो को गिनते है ,

देख अपनी संतानों को बेटी जनने से डरते हैं ,

बेटे की करतूतो से वो तिल -तिल मरते है ,

शुक्र  करो उन माँ -बाप का ,

जो इतना सब सहने पर भी ,

संतानो के ही सुख -दुःख में जीते-मरते है ,

शुक्र  करो उन माँ -बाप का ,

जो तेरे दर्द के आगे ,

अपनी फिक्र नहीं करते है ,

शर्म करो इश्कजादों ,

ये  तुम क्या करते हो

                              – Amresh mishra (sam)

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