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बन गए हम पश्चिमी देखो….


“बन गए हम पश्चिमी देखो….”

“बदल रहे है मौसम देखो,

बदल रहें है लोग,

बदल गया इन्सान देखो,

बन गए सब ढोंग ,

मैले हो गए रिश्ते देखो,

मैली हो गयी सोच,

सभ्यता के पदचिन्ह ना रहे,

बन गए हम पश्चिमी देखो,

हो गए हम पराये ,

माँ-बहने अब घर में बैठी,

बाहर घूम रहे हैवान देखो,

बंद कर ली आंखे क्यों,

कुछ सच तुम भी देखो,

झूठे लगते है सच्चे भी,

ये हो रहा है क्यों ?

क्यों टूट गया विश्वाश है,

अब तुम ही कुछ देखो,

इतना मत बदलो ऐ लोगो,

कुछ खुद को भी देखो,

उस ऊपरवाले को ना भूलो,

कुछ कल को भी देखो

झूठे रिश्तों के मत पीछे भागो,

कुछ सच्चे को भी देखो,

एक-दूजे को न कोसो अब,

कुछ खुद को भी देखो,

दूसरों जैसे न बनना,

अपनी भी कुछ कर लो, 

अच्छाई के संग न चले तो

बुराई की ओर तो न देखो |”

” बस एक दुआ करता हूँ उनसे….”


” बस एक दुआ करता हूँ उनसे….”

“कुछ बीते पल सताने लगें है आज ,
कुछ लोग भुलाने लगे हैं आज,
ऐसी ज़िन्दगी बन गयी है हमारी ,
डरते न थे जिससे हम हकीकत में,
वो सपनों में डराने लगे हैं आज ,
सुबह हम सब भूल जाया करते थे ,
वो सुबह भी याद आने लगे है आज,
ऐसा एहसास मन में जग रहा है ,
हर तरफ बस वही दिख रहा है ,
मैंने क्या की गलती जो ,
आज हमारा सब कुछ बिखर रहा है ,
बस एक दुआ करता हूँ उनसे,
जिन्होंने हमारी दुनिया बनायीं,
न मिटने देना हमारी दुनिया को ,
न दूर करना हमारे अपनों को ,
न तोड़ना हमारे सपनो को ….,
हमारे जीने का मकसद है ये….,
न तोडना हमारे मकसद को… ,
न तोडना हमारे मकसद को …| “

©AMRESH MISHRA

“ यहाँ तो केवल गलतियाँ ढूढ़ी जाती है.. ”


यहाँ तो केवल गल्त्तियां ढूढ़ी जाती है..

‘‘उंगलियां सभी उठाते हैं एक-दूजे पर,

यहाँ तो केवल गल्त्तियां ढूढ़ी जाती है,

भर पाप का प्याला पी जाते हैं इंसानियत,

फिर भी इंसान होने का अधिकार मांगते हैं,

खुद गलतियों के सागर से नहा कर निकलें हैं जनाब,

फिर क्यों बेगुनाह को गुनहगार मानते हैं। ’’

“यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे…”


 “यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे…”

yadein

खुली रखना आंखें नजर आयेंगी मंजिलें तुझे

न पलकों को भिगोना,

धुंधली पड़ जायेंगे सपनें….

सम्भाल कर रखो बीते पलों की यादों को …..

ये यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे,

तेरी मंजिलो तक पहुंचाएंगी तुझे,

बार बार एक भूल से तुझे बचाएंगी ये,

यादों का सहारा न छोड़ना तुम ,

टूट जायेंगे सपने तो ,

बैसाखी बन जाएँगी ये,

सच हो गए गए सपने तो,

नए सपने दिखाएंगी ये।’’

©Amreshmishra

“हम सब को प्यारी है माँ….”


जानिए अपना भविष्य.
pyari maa

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‘‘जीवन जगत में पुण्य का कलश है माँ….”

देवी का रुप और ममता का स्वरुप है माँ…,

ख़ुशी का स्त्रोत है माँ……,

बालक के सपनों का बस एक ही आधार है माँ……,

हम सब को प्यारी है माँ…………..

सूरज के प्रकोप में वृक्ष की निर्मलता है माँ…..,

जीवन के मरुस्थल पर बस एक मिली सीतलता है माँ..,

जीवन में पूजना तो सिर्फ माँ को……

क्योंकि जग-जननी और देवों में भी अराधिनीं है माँ……..”

©अमरेश मिश्रा

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तब मुझे इंसाफ मिल जायेगा……



“ नहीं चाहिए मुझे मोम्बतियों की शांति,

जलन होती है मुझे,

नहीं चाहिये दिलाशा आपका,

कुछ हाशिल नहीं होता मुझे,

रोक लेना खुद को सच की रहा भटकने से,

रोक लेना खुद को कुछ गलत करने से,

मुझे इंसाफ मिल जायेगा ।

देख कर ये झूठे चेहरे,

घुटन होती है मुझे,

आज भी गूंजती है
वो चीखे मेरे कानो में,

रोक लेना खुद को हैवान बनने से,

मुहे इंसाफ मिल जायेगा ।

आहट भी डरा जाती है मुझे,

आकेली पड़ गयी थी इस जन्हा में,

मत पड़ने देना किसी और को अकेला,

तब मुझे इंसाफ मिल जायेगा ।

नहीं चाहिये लिबाज ऐसा…जो केवल मेरे तन को ढँक ले,

अपने मन के पाप को जब तुम साफ़ कर लेना,

गलत सही के अंतर को जब मन में धारण कर लेना,

तो मुझे इंसाफ मिल जायेगा,

अगर ना कर पाए इतना तुम,

तो मोमबतियाँ ना जलाना,

रूह जलती है मेरी….

बची इंसानियत जलती है तेरी…

रौशनी मिलती है बुराई को ….

अच्छाइयां डरती है तेरी….।।“

©Amresh mishra


 

“क्या पता कल क्या होगा……..?


“क्या पता कल क्या होगा……..?

कौन रहे साथ……?…..कौन दूर होगा……?

हर पल यहाँ कुछ अच्छा ही करना…..।
आज किया जो अच्छा तो कल अच्छा ही होगा………..।”

                                                                                                ©Amresh mishra(sam)