“यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे…”


 “यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे…”

yadein

खुली रखना आंखें नजर आयेंगी मंजिलें तुझे

न पलकों को भिगोना,

धुंधली पड़ जायेंगे सपनें….

सम्भाल कर रखो बीते पलों की यादों को …..

ये यादें दिखायेंगी रास्ता तुम्हे,

तेरी मंजिलो तक पहुंचाएंगी तुझे,

बार बार एक भूल से तुझे बचाएंगी ये,

यादों का सहारा न छोड़ना तुम ,

टूट जायेंगे सपने तो ,

बैसाखी बन जाएँगी ये,

सच हो गए गए सपने तो,

नए सपने दिखाएंगी ये।’’

©Amreshmishra

“हम सब को प्यारी है माँ….”


जानिए अपना भविष्य.
pyari maa

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‘‘जीवन जगत में पुण्य का कलश है माँ….”

देवी का रुप और ममता का स्वरुप है माँ…,

ख़ुशी का स्त्रोत है माँ……,

बालक के सपनों का बस एक ही आधार है माँ……,

हम सब को प्यारी है माँ…………..

सूरज के प्रकोप में वृक्ष की निर्मलता है माँ…..,

जीवन के मरुस्थल पर बस एक मिली सीतलता है माँ..,

जीवन में पूजना तो सिर्फ माँ को……

क्योंकि जग-जननी और देवों में भी अराधिनीं है माँ……..”

©अमरेश मिश्रा

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Some Changes in BCS-055 question solution- solution-8


Like doting parents, the robot researchers worry about the inner lives of their machines and how best to guide them through sticky social situations. Bullying by children has already been a problem. Researchers at the University of California, San Diego were horrified when toddlers learning vocabulary at the university’s Early Childhood Education Center took only minutes to bash apart a robotic arm assembled over more than six months.

तब मुझे इंसाफ मिल जायेगा……



“ नहीं चाहिए मुझे मोम्बतियों की शांति,

जलन होती है मुझे,

नहीं चाहिये दिलाशा आपका,

कुछ हाशिल नहीं होता मुझे,

रोक लेना खुद को सच की रहा भटकने से,

रोक लेना खुद को कुछ गलत करने से,

मुझे इंसाफ मिल जायेगा ।

देख कर ये झूठे चेहरे,

घुटन होती है मुझे,

आज भी गूंजती है
वो चीखे मेरे कानो में,

रोक लेना खुद को हैवान बनने से,

मुहे इंसाफ मिल जायेगा ।

आहट भी डरा जाती है मुझे,

आकेली पड़ गयी थी इस जन्हा में,

मत पड़ने देना किसी और को अकेला,

तब मुझे इंसाफ मिल जायेगा ।

नहीं चाहिये लिबाज ऐसा…जो केवल मेरे तन को ढँक ले,

अपने मन के पाप को जब तुम साफ़ कर लेना,

गलत सही के अंतर को जब मन में धारण कर लेना,

तो मुझे इंसाफ मिल जायेगा,

अगर ना कर पाए इतना तुम,

तो मोमबतियाँ ना जलाना,

रूह जलती है मेरी….

बची इंसानियत जलती है तेरी…

रौशनी मिलती है बुराई को ….

अच्छाइयां डरती है तेरी….।।“

©Amresh mishra


 

“क्या पता कल क्या होगा……..?


“क्या पता कल क्या होगा……..?

कौन रहे साथ……?…..कौन दूर होगा……?

हर पल यहाँ कुछ अच्छा ही करना…..।
आज किया जो अच्छा तो कल अच्छा ही होगा………..।”

                                                                                                ©Amresh mishra(sam)

ये तुम क्या करते हो…………


किससे डरते है ये ,

किसकी निगाँहो से बचते है ये ,

तोड़ के मर्यादा क्या साबित करते है ये ,

गलत की परिभाषा को क्यों परिभाषित करते हैं ये ,

माँ -बाप भी देख इन्हें अपने कर्मो को गिनते है ,

देख अपनी संतानों को बेटी जनने से डरते हैं ,

बेटे की करतूतो से वो तिल -तिल मरते है ,

शुक्र  करो उन माँ -बाप का ,

जो इतना सब सहने पर भी ,

संतानो के ही सुख -दुःख में जीते-मरते है ,

शुक्र  करो उन माँ -बाप का ,

जो तेरे दर्द के आगे ,

अपनी फिक्र नहीं करते है ,

शर्म करो इश्कजादों ,

ये  तुम क्या करते हो

                              – Amresh mishra (sam)